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हरीश रावत की प्रदेश कार्यकारिणी तथा कांग्रेस कार्य समिति से इस्तीफे की पेशकश

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नयी दिल्ली, 12 सितंबर (वार्ता) उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने पार्टी के दो अहम पदों, उत्तराखंड प्रदेश कार्यकारिणी तथा पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था कांग्रेस कार्य समिति से इस्तीफा देने की पेशकश की है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद के दौरान उनके ओएसडी रहे करीबी सहयोगी चंदन सिंह जीना पर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई में बड़ी मात्रा में नकदी और आभूषण बरामद होने के बाद श्री रावत ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के बीच इस तरह के आरोपों से पार्टी को नुकसान हो सकता है इसलिए उन्होंने प्रदेश कार्यकारिणी और कांग्रेस कार्य समिति सदस्य पद से हटने का निर्णय लिया है।

श्री रावत ने अपने इस्तीफे की खबरों के बीच शनिवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "मीडिया के कुछ हिस्सों में यह समाचार दिया जा रहा है कि हरीश रावत ने कांग्रेस पार्टी से त्यागपत्र दे दिया। भैया, कांग्रेस पार्टी की सदस्यता मेरे खून और हड्डियों में है, हरीश रावत जो कुछ भी है, उस सबका निर्माण करती है। वह तो मेरे साथ ही स्वर्ग में भी जायेगी।" उन्होंने आगे लिखा, "हाँ, यदि कल-परसों देहरादून में ईडी का जो पाखंडपूर्ण चकल्लस हुई है और मैंने यह कहा है कि यदि उससे कांग्रेस पार्टी के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के नैरेटिव पर कोई असर पड़ता है, तो पार्टी के जो पद मेरे पास हैं-प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य और एआईसीसी की वर्किंग कमेटी के सदस्य-मैं उन पदों से त्यागपत्र देना चाहूँगा। अतः मीडिया के दोस्तों से मेरा आग्रह है कि मेरे पोस्ट को ज़रा संपूर्णता में पढ़ें और अपने समाचार को करेक्ट करें।"

श्री रावत ने इससे पहले भी सोशल मीडिया एक्स पर अपने इस्तीफे को लेकर लंबा स्पष्टीकरण देते हुए लिखा, "सामने टीवी पर खबर आ रही है कि देहरादून में हरीश रावत के पीए के पास भारी मात्रा में कैश और ज्वैलरी आदि पकड़ी गयी या पकड़ायी गयी, इस तथ्य का खुलासा तो आने वाले समय में होगा और यह सत्य है कि श्री जीना मेरे ओएसडी रहे हैं और मैं जितने भी पदों पर रहा, चाहे पार्टी में रहा या सरकार में रहा, वह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। श्री जीना एक निहायती सज्जन, विनम्र और काम करने वाले व्यक्ति हैं। यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ की और यदि इस तरीके की कोई भी गलती उन्होंने की है, उसके प्रमाण हैं तो उनके इस तथाकथित दुस्साहसिक कृत्य के लिए मैं लज्जित हूँ लेकिन मुझे इस आरोप पर बिल्कुल विश्वास नहीं है।"

उन्होंने श्री जीना के खिलाफ की गई कार्रवाई को एक सुनियोजित चाल होने की आशंका व्यक्त करते हुए कहा, "उत्तराखंड के चुनाव में भारी स्टेक्स हैं। मुझसे जब भी कोई व्यक्ति पूछता था कि चुनाव कब हो रहे हैं, तो मैं हंसी में उनसे कहता था कि भई चुनाव तब होंगे, जब सीबीआई मेरे दरवाजे पर दस्तक देने आएगी। यदि अभी नहीं आई है तो इसका अर्थ है कि चुनाव अगले वर्ष मार्च-अप्रैल में ही होंगे लेकिन इस बार मेरे घर पर नहीं, मेरे एक सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक नरेटिव बनाने का प्रयास किया गया है। कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लामबंद होकर लड़ रहे हैं।

राहुल गांधी जी राष्ट्रीय स्तर पर 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। ऐसे समय में हरीश रावत के किसी भी कृत्य से यदि पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी आती है, तो मैं ऐसा बिल्कुल नहीं चाहूँगा। इसलिए मैंने अभी अपने ईष्ट देवता का स्मरण करके एक बड़ा निर्णय लिया है कि मैं किसी सरकारी पद पर तो हूं नहीं, कि उससे त्यागपत्र दूं। हां मैं, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी का सदस्य हूं और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति का स्थाई आमंत्रित सदस्य हूं और मैं बहुत विनम्रता पूर्वक इन दोनों पदों से हटना चाहूंगा, क्योंकि पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी मेरी वजह से नहीं आनी चाहिए।" पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे अपने ट्वीट में कहा, "रहा प्रश्न अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का, उसका गठन हमने राज्य के नौजवानों के भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए किया। हमने पब्लिक सर्विस कमीशन को समय पर परीक्षाएँ लेने के लिए बाध्य किया, यहाँ तक कि दो बार शीर्ष पदों की भर्तियाँ हुईं, हमारे छोटे से कार्यकाल में। हमने भर्ती बोर्ड्स बनाए, मेडिकल भर्ती बोर्ड बनाया, शिक्षा भर्ती बोर्ड बनाया। यदि उस प्रक्रिया के दौरान नियुक्तियों में हमसे कोई एरर ऑफ़ जजमेंट हो गया है, तो मैं उसके लिए उत्तराखंड के लोगों से क्षमा प्रार्थी हूँ। मगर मैं विनम्रता पूर्वक अपना यह दावा दोहराना चाहता हूं कि हमारे 3 वर्ष के कार्यकाल में 42,000 से ज्यादा सरकारी पदों पर भर्तियां हुई हैं।

उन्होंने कहा , " हमने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के चेयरमैन के पद पर जिस व्यक्ति को नियुक्त किया था, जिन्हें मैंने ही शिकायत मिलने के बाद हटाया या उनसे इस्तीफा माँगा, जो भी जिस रूप में भी कह लिया जाए। उनकी नियुक्ति पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी। वो जिस वर्ग से आते थे, मैं चाहता था कि सत्ता में उस वर्ग की भी हिस्सेदारी हो और उनकी नियुक्ति के विषय में मुझे सबसे प्रभावी सलाह तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी जी ने दी थी। वो दो बार मेरे पास उनकी नियुक्ति के संदर्भ में मिलने आए थे। मेरी आज भी धारणा है कि खंडूरी जी भ्रष्टाचार के शमन के लिए हमेशा काम करते रहे। मैं इतना और बताते चलूँ कि कौन व्यक्ति कहाँ पर गलती कर दे, कोई नहीं जान सकता है। क्या आरएसएस ने जाना होगा कि जिस व्यक्ति को उत्तराखंड के अपने पर्यावरण मंच का अध्यक्ष बना रहे हैं, वो व्यक्ति इस तरीके के भ्रष्ट कृत्य करेगा? और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष के रूप में कलंकित होगा!"

श्री रावत ने कहा कि नियुक्तियों तथा परीक्षाओं में गड़बड़ी आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं और यदि उनसे जाने-अंजाने में भी कोई ऐसा कृत्य हुआ है, जिससे हमारे राज्य के नौजवानों के भविष्य पर दुष्प्रभाव पड़ा है, तो उसके लिए वह खुद को प्रताड़ना का पात्र मानते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों से इस चूक के लिए वह क्षमा चाहते हैं। उन्होंने कहा, "मैं सार्वजनिक रूप से एक अपील भी करना चाहता हूं कि यदि किसी व्यक्ति को इस तरह की नियुक्तियों के मामले में हस्तक्षेप करने की मेरी संलिप्तता के कोई प्रमाण उनके पास हों तो वो उन प्रमाणों को सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस को जरूर उपलब्ध करवाएं। क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को जिसे बड़े दायित्व को संभालने का अवसर मिलता है तो उन्हें हमेशा इस तरीके के घृणित प्रलोभनों से बचना चाहिए और यदि मुझसे कोई ऐसी चूक हुई है तो पुनः दोहरा रहा हूं कि मैं अपने को दंड का पात्र समझता हूं और कानून को मुझे दंडित करना चाहिए।" अभिनव अशोक वार्ता

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
1116
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
कांग्रेस लीड हरीश रावत इस्तीफा
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
12/09/26 11:06
पिछला अपडेट
12/09/26 11:06
स्थान
India