एक्सक्लूसिव ख़बरें और डेटा, जो मार्केट प्रोफेशनल्स को रखते हैं सबसे आगे। 09/09/26 10:54

........

श्री सत्यनारायण को असल पहचान 1974 के जयप्रकाश (जेपी) आंदोलन में मिली,जब लोकनायक के नेतृत्व में चले संपूर्ण क्रांति आंदोलन के दौरान उन्होंने फणीश्वरनाथ रेणु की अगुआई में नुक्कड़ और चौराहों पर काव्य-पाठ किया। उनकी कविताएं आंदोलनकारियों के बीच उत्साह और जनचेतना पैदा करने का माध्यम बनीं। उनके नुक्कड़ गीत 'जुल्म का चक्कर और तबाही कितने दिन' जैसे गीत लोगों की जुबान पर चढ़ गए थे। उनकी व्यंग्यात्मक और जनपक्षधर कविताओं ने आंदोलन के दौरान जनमत निर्माण में भूमिका निभाई। यही वह दौर था, जब सत्यनारायण की कविता ने साबित किया कि साहित्य केवल मनोरंजन या सौंदर्यबोध का माध्यम नहीं,…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
बिहार कवि सत्यनारायण स्मृति शेष दो पटना
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
,
प्रकाशित तिथि
29/08/26 10:26
पिछला अपडेट
29/08/26 10:26
स्थान
India