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बिहार गीत के रचयिता कवि सत्यनारायण ने छह दशकों की रचनात्मक यात्रा में बहुमुखी आयामों को स्पर्श किया

पटना, 29 अगस्त (वार्ता) कवि सत्यनारायण की पहचान एक ऐसे जनकवि के रूप में है, जिनकी कविता नुक्कड़ों पर कही गई, एकांत के कोमल लम्हों में पढ़ी गई और एक समय आया तो पूरे बिहार की अस्मिता और गौरव का स्वर बन कर समारोहों की शोभा बन गई। मशहूर चिंतक, लेखक, कवि और साहित्यकार शिवदयाल 1974 के जयप्रकाश (जेपी) आंदोलन को याद करते हुए कहते हैं, उस समय बिहार के दो रचनाकारों कवि फणीश्वर नाथ रेणु और बाबा नागार्जुन राजधानी पटना के नुक्कड़ों पर अपनी रचनाधर्मिता की छाप छोड़ रहे थे, उन्ही के साथ एक तीसरा नाम था कवि सत्यनारायण…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
बिहार कवि सत्यनारायण स्मृति शेष
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
29/08/26 10:25
पिछला अपडेट
29/08/26 10:25
स्थान
India