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जमीन का अतिक्रमण करने वाले यह तय नहीं कर सकते कि इसका उपयोग कैसे किया जाएः सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली, 24 फरवरी (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि हल्द्वानी में रेलवे की जमीन से बेदखली का सामना कर रहे निवासी उसी स्थान पर पुनर्वास के लिए जोर नहीं दे सकते। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली की पीठ ने कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए दोनों तरफ खाली जमीन की आवश्यकता होती है और रेलवे की संपत्ति पर कब्जा करने वाले लोग यह तय नहीं कर सकते कि पटरियां कहां बिछाई जानी चाहिए। न्यायालय ने टिप्पणी की कि जमीन रेलवे की है और अतिक्रमणकारी यह तय नहीं कर सकते कि…

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टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
न्यायालय जमीन अतिक्रमण
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
24/02/26 00:00
पिछला अपडेट
24/02/26 00:00
स्थान
India