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समान नागरिक संहिता पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कानून जरूरी, पर फैसला संसद पर

नयी दिल्ली, 10 मार्च (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को पर्सनल कानूनों से सामने आने वाली कानूनी जटिलताएं दूर करने और महिलाओं के हकों को पक्का करने के लिए 'समान नागरिक संहिता' की जरूरत पर बल देते कहा है कि इस बारे में कानून बनाने का फैसला संसद के विवेक पर निर्भर करता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति जे.आर. महादेवन की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। याचिका में 'मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट, 1937' के उन प्रावधानों को चुनौती दी गई थी, जो कथित तौर पर उत्तराधिकार के मामलों…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
सुप्रीम कोर्ट नागरिक संहिता
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
10/03/26 00:00
पिछला अपडेट
10/03/26 00:00
स्थान
India