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सबरीमाला सुनवाईः तुषार मेहता की दलील, धार्मिक- सामाजिक सुधार विधायिका का विषय है न कि न्यायपालिका का

नयी दिल्ली, 07 अप्रैल (वार्ता) केंद्र सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय को अवगत कराया कि धार्मिक प्रथाओं से जुड़े सामाजिक सुधार के मुद्दे न्यायपालिका के बजाय विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। यह दलील तब दी गई जब नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मामले में अंतिम सुनवाई शुरू की। केंद्र सरकार की ओर से दलीलें शुरू करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अदालतों को आस्था के मामलों में संयम बरतना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी पूजा स्थल पर एक निश्चित आयु वर्ग की महिलाओं के…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
सुप्रीम कोर्ट लीड सबरीमाला सुनवाई
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
07/04/26 00:00
पिछला अपडेट
07/04/26 00:00
स्थान
India