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गजलों के जरिए उर्दू शायरी को नया लहजा दिया बशीर बद्र ने

मेरठ, 28 मई (वार्ता) "उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए..." अपनी शायरी में यादों, मोहब्बत और इंसानी जज्बातों को हमेशा जिंदा रखने वाले मशहूर शायर बशीर बद्र आखिरकार खुद भी यादों का हिस्सा बन गये। उनकी आवाज भले ही अब खामोश हो गयी हो लेकिन उनके अल्फाज आने वाली पीढ़ियों तक दिलों में उजाले बिखेरते रहेंगे। इक्यानवे वर्ष की आयु में उनके निधन के साथ उर्दू अदब का एक ऐसा दौर समाप्त हो गया जिसने गजलों को महफिलों से निकालकर आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बना दिया…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
मप्र दूसरी लीड बशीर बद्र जीवन परिचय
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
28/05/26 13:12
पिछला अपडेट
28/05/26 13:12
स्थान
India