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1934 में दादा लाए थे आल्हा की किताब, 92 साल बाद भी धनोरा में गूंजती है वीरगाथा

बैतूल, 31 अगस्त (वार्ता) मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की भीमपुर तहसील के ग्राम आदर्श धनोरा में भुजरिया का त्योहार पूजा और विसर्जन तक सीमित नहीं है। यहां इस अवसर पर 92 साल पुरानी परंपरा के तहत पूरा गांव एक साथ बैठकर वीरगाथा 'आल्हा' का सामूहिक गायन करता है। खास बात यह है कि इसमें सभी समाजों के लोग शामिल होकर वीर रस की गाथा गाते हैं। गांव के पटेल गणेशसिंह गौतम के अनुसार इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1934 में उनके दादा गंगूसिंह (लंगड़ा) पटेल ने की थी। वह पहली बार आल्हा की किताब गांव में लेकर आए थे। इसके…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
म.प्र. बैतूल धनोरा आल्हा परंपरा
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
31/08/26 09:55
पिछला अपडेट
31/08/26 09:55
स्थान
India