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दारूल उलूम को दान-चंदे में किताबें भी चाहिएः नायब मोहतमिम अब्दुल खालिक मद्रासी

देवबंद (सहारनपुर) 18 जून (वार्ता) देवबंद में 31 मई वर्ष 1866 बृहस्पितवार के रोज मस्जिद छत्ता के खुले आंगन में अनार के पेड़ के साए में शुरू हुए देवबंदी विचारधारा के धार्मिक शिक्षा के केंद्र दारूल उलूम देवबंद को अपनी विशाल लाइब्रेरी के लिए अब चंदे और दान में इस्लाम धर्म हिंदू धर्म, इतिहास, संस्कृति और दर्शन एवं साहित्य की पुस्तकें भी चाहिए। देवबंद इस्लामिक पुस्तकों के प्रकाशन का भी सबसे बड़ा केंद्र है। दारूल-उलूम इसकी एशिया की सबसे बड़ी एवं आलीशान रशिदिया मस्जिद ओर लाइब्रेरी को देखने हजारों पर्यटक एवं मजहबी लोग रोज यहां पहुंचते है। पिछले कुछ वर्षों…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
दारुल उलूम लाइब्रेरी
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
18/06/26 11:50
पिछला अपडेट
18/06/26 11:50
स्थान
India