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नई पीढ़ी से दूर होती आल्हा की वीर गाथा, विलुप्ति की कगार पर बुंदेलखंड की लोकगायन परंपरा

जालौन, 18 अगस्त (वार्ता) बुंदेलखंड की धरती पर कभी रात-रात भर गूंजने वाला आल्हा गायन अब धीरे-धीरे अतीत की बात बनता जा रहा है। एक समूह में बैठकर आल्हा गायन का आनंद लेने वालों के लिए इसकी अनुभूति को शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। वीर रस से परिपूर्ण इस लोकगायन में शौर्य, पराक्रम और उत्साह की ऐसी अनुभूति होती है कि श्रोता स्वयं को गाथा का हिस्सा महसूस करने लगता है लेकिन आधुनिक मनोरंजन के साधनों और बदलती जीवनशैली के बीच नई पीढ़ी का इस पारंपरिक विधा से मोहभंग होता दिखाई दे रहा है। बुंदेलखंड की पहचान बने…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
लोकरुचि आल्हा विलुप्ति
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
18/08/26 06:43
पिछला अपडेट
18/08/26 06:43
स्थान
India