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धुंधली पड़ने लगी हैं ग्रामीण खेलों की परंपरा, चौपड़, कौड़ी और चपेटा आज भी देते हैं परिवार को जोड़ने का संदेश

जालौन 9 जून (वार्ता) उत्तर प्रदेश में जालौन जिले के बुंदेलखंड की पहचान केवल उसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक वैभव से ही नहीं, बल्कि गांवों में जीवित रही उन पारंपरिक खेल परंपराओं से भी रही है, जिन्होंने पीढ़ियों को एक-दूसरे से जोड़े रखा। जालौन जिले के गांवों में गर्मी का मौसम कभी बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए खेल-कूद और सामूहिक मेलजोल का समय हुआ करता था। गांव की चौपाल, पेड़ों की छांव, आंगन और गलियां लोगों की हंसी-खुशी से गूंजती थीं। लेकिन आज मोबाइल फोन और इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव ने इन परंपरागत खेलों को धीरे-धीरे हाशिए पर पहुंचा दिया…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
लोकरुचि ग्रामीण खेल
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
09/06/26 10:36
पिछला अपडेट
09/06/26 10:36
स्थान
India