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कभी रिश्तों की गर्माहट का अहसास कराने वाली 'चिट्ठी' अब बन चुकी है इतिहास

जालौन, 22 मई (वार्ता) एक समय था जब घर के बाहर पोस्टमैन की साइकिल की हल्की-सी घंटी सुनते ही लोगों के चेहरे खिल उठते थे। उस दौर में चिट्ठियां केवल कागज के टुकड़े नहीं होती थीं, बल्कि रिश्तों की गर्माहट और भावनाओं की धड़कन हुआ करती थीं। वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. हरिमोहन पुरवार ने कहा कि आज मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के युग में संदेश पलभर में पहुंच जाते हैं। वीडियो कॉल और मैसेजिंग एप ने संवाद को बेहद आसान बना दिया है, लेकिन हाथों से लिखी चिट्ठियों में जो आत्मीयता और अपनापन होता था, वह अब कहीं खोता जा…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
लोकरुचि चिट्ठी अहसास
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
22/05/26 08:41
पिछला अपडेट
22/05/26 08:41
स्थान
India