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जहां सिक्कों, डाक टिकटों और दुर्लभ कलाकृतियों में बसती है संगीत की विरासत

जालौन, 13 जून (वार्ता) संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति, अध्यात्म और मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। विश्व भर में प्रतिवर्ष 21 जून को विश्व संगीत दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1982 में फ्रांस के तत्कालीन संस्कृति मंत्री जैक लैंग और संगीतकार मॉरिस फ्लरेट की पहल पर शुरू हुए इस दिवस का उद्देश्य संगीत की सार्वभौमिक शक्ति को सम्मान देना और उसे जन-जन तक पहुंचाना था। इसी भावना को साकार करते हुए उत्तर प्रदेश के जालौन जिला मुख्यालय उरई के प्रतिष्ठित दंपति डॉ. हरीमोहन पुरवार और श्रीमती संध्या पुरवार ने वर्षों की मेहनत से एक…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
लोकरुचि संगीत विरासत
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
13/06/26 09:06
पिछला अपडेट
13/06/26 09:06
स्थान
India