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सावन पर पेड़ों की डालियों पर पड़े झूलों की जगह ली मोबाइल फोन पर बनती रीलों ने

जालौन, 17 अगस्त (वार्ता) बुंदेलखंड में सावन का महीनो कभी लोक संस्कृति, सामाजिक मेलजोल और पारंपरिक उत्सवों का जीवंत प्रतीक माना जाता था मगर बदलते परिवेश में अब पेड़ों की डालियों पर झूलों की जगह मोबाइल की स्क्रीन पर सावन की रीलें अधिक दिखाई देने लगी हैं। दो दशक पहले तक सावन के आते ही गांवों की तस्वीर बदल जाती थी। आम, नीम और बरगद की मजबूत डालियों पर रस्सियों के झूले पड़ते थे, कजरी गीतों की स्वर लहरियां वातावरण में गूंजती थीं और सखियों की टोली घंटों झूला झूलते हुए सावन की मस्ती में डूबी रहती थी। लेकिन बदलते…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
लोकरुचि सावन रील
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
17/08/26 09:31
पिछला अपडेट
17/08/26 09:31
स्थान
India