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लाख टके का सवाल, संक्रमणकाल से गुजर रही सपा को सियासी भंवर से कैसे निकालेंगे मुलायम

लाख टके का सवाल, संक्रमणकाल से गुजर रही सपा को सियासी भंवर से कैसे निकालेंगे मुलायम

लखनऊ 30 दिसम्बर (वार्ता) स्थापना के बाद अब तक के सबसे कठिन दौर से गुजर रही समाजवादी पार्टी (सपा) की ओर उठने वाली हर एक की निगाह अब एक ही सवाल कर रही है कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव पार्टी को सियासी भंवर से कैसे निकालेंगे। राजनीति जीवनकाल में एक से बढकर एक कठिनाइयों को चुटकी में हल करने की कला में माहिर सपा मुखिया भाई (शिवपाल) और पुत्र (अखिलेश यादव) के बीच वर्चस्व को लेकर जारी अंर्तकलह से टूट की कगार पर पहुंच चुकी पार्टी को सियासी वैतरणी से निकालने के अंदाज पर हर किसी की निगाहें लगी हुयी हैं। दरअसल, यादव परिवार में दरार की आहट गत 21 जून में उस समय आ गयी थी जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल (कौएद) के सपा में विलय की घोषणा की थी। सपा मुखिया की सहमति से कौएद के सपा में विलय की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जोरदार खिलाफत की और इसे लेकर चाचा (शिवपाल) और भतीजे (अखिलेश) आमने सामने आ गये। पिछले छह महीने में वर्चस्व को लेकर जारी जंग को संभालने के लिये सपा मुखिया ने कई प्रयास किये। टिकट बंटवारे को लेकर चाचा भतीजे के बीच मतभेद को लेकर पिछले कई दिनों से पार्टी दो फाड में नजर आने लगी थी। नरेन्द्र प्रदीप चौरसिया जारी वार्ता