राज्यPosted at: Sep 15 2016 8:23PM बिहार की संस्कृति और परंपरा काफी धनी : सोनलपटना 15 सितंबर (वार्ता) जानी-मानी नृत्यांगना और पद्मश्री सोनल मानसिंह ने कहा कि बिहार की संस्कृति और परंपरा काफी धनी है और नयी पीढ़ी को मूल्यों से जोड़े रखती है। बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम लिमिटेड (कला संस्कृति विभाग) द्वारा आयोजित बिहार शार्ट एवं डॉक्यूमेंट्री फिल्म महोत्सव 2016 में शिरकत करने आई सुश्री सिंह ने कहा कि नृत्य-संगीत सिर्फ नाच-गाना नहीं है। मोक्ष के मार्ग का सबसे सरल और आसान रास्ता नृत्य और संगीत है। उन्होंने कहा बिहार की संस्कृति और परंपरा काफी धनी है। सुश्री सिंह ने कहा “मिथिला, भोजपुरी, ध्रुपद जैसी कलाएं बिहार की संस्कृति को धनी बनाती है और इसके साथ ही हमारी नई पीढ़ी को मूल्यों से जोड़े रखती है। उन्होंने बिहार के कवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता 'मेरे भारत के दिव्य हार' का उद्धरण देते हुए कहा कि यहां के विद्वानों में अद्भुत क्षमता थी, जिसके बारे में वे आज हमारे देश समाज की स्थितियों के बारे में लिख देते थे। पद्मश्री ने अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण पड़ावों पर चर्चा करते हुए कहा कि जब जिद्द दिल से हो तो परिणाम अच्छा ही होता है, हां यदि उसमें अपने लिए कुछ भी ना हो। जो चीजें समाज से नहीं जुड़ती हैं, वो खत्म हो जाती है। इस अवसर पर जाने-माने फिल्मकार गौतम घोष ने कहा कि बिहार भारतीय संस्कृति का केंद्र है। यहां का इतिहास, सभ्यता और संस्कृति काफी समृद्ध है। बिहार की पंरपरा लोगों के खून में बसती है। हालांकि मानवता के इतिहास में मोबाइल ने बड़ा चेंज लाया दिया, लेकिन फिर भी हमारी सभ्यता और संस्कृति की जड़ें इतनी गहरी है कि तकनीकी बदलाव के बाद भी यहां मूल्य कायम हैं। हजारों वर्ष पुरानी परंपराएं आज भी जीवित हैं। प्रेम, सूरज वार्ता