गिफू, 01 अक्टूबर (वार्ता) नितेश सिवाच ने गुरुवार को पुरुषों के 97 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतकर एशियाई खेलों की ग्रीको-रोमन कुश्ती में भारतीय फाइनलिस्ट के लिए 64 साल का इंतज़ार खत्म किया और देश के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा।
आज यहां खिताबी मुकाबले में सिवाच को जापान के यूरी नकाजातो ने हराकर स्वर्ण पदक जीता । वहीं सिवाच दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। यह उस खेल में एक ऐतिहासिक पदक है जिसमें देश ने पहले केवल चार कांस्य पदक जीते थे। सिवाच फाइनल तक के सफर में शानदार दिखे। उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत क्वार्टर फाइनल में तुर्कमेनिस्तान के अमनबेर्डी अगामामेदोव पर 7-1 की जीत के साथ की और फिर सेमीफाइनल में मंगोलिया के गंखुयांग गनबातार के खिलाफ और भी दमदार प्रदर्शन किया।
एशियाई चैंपियनशिप के रजत पदक जीतने वाले सिवाच ने 'टेक्निकल सुपीरियरिटी' (तकनीकी श्रेष्ठता) के आधार पर गनबातार को 9-0 से हराया और शुरुआती तीन मिनट के पीरियड में ही मुकाबला खत्म कर दिया। सिवाच के सेमीफाइनल मुकाबले में ग्राउंड पोजीशन से दो 'फोर-पॉइंट थ्रो' (चार अंक वाले दांव) देखने को मिले, जिससे मंगोलियाई पहलवान कोई जवाब नहीं दे पाया और भारतीय पहलवान ने गोल्ड मेडल मुकाबले में अपनी जगह पक्की कर ली। फाइनल मुकाबला ज़्यादा मुश्किल साबित हुआ, जिसमें नकाज़ातो ने शुरुआत में ही 2-0 की बढ़त बना ली।
सिवाच इस अंतर को पाट नहीं पाए और जापानी पहलवान ने अपनी बढ़त बनाए रखते हुए गोल्ड मेडल जीत लिया। पोडियम पर शीर्ष स्थान न मिल पाने के बावजूद, सिवाच का रजत पदक एशियाई खेलों की ग्रीको-रोमन कुश्ती में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा और इस खेल में फाइनलिस्ट के लिए लंबे समय से चला आ रहा इंतज़ार खत्म हुआ।
राम वार्ता