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असहमति के बाद भी सहयोगी आयुक्तों को तरजीह नहीं देते ज्ञानेश कुमार, तत्काल दें इस्तीफा : कांग्रेस

असहमति के बाद भी सहयोगी आयुक्तों को तरजीह नहीं देते ज्ञानेश कुमार, तत्काल दें इस्तीफा : कांग्रेस

नयी दिल्ली, 23 सितंबर (वार्ता) कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर 'वोट चोरी' की प्रक्रिया में भूमिका निभाने और अपने सहयोगी चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों तथा अधिकारों को तरजीह नहीं देने का आरोप लगाते हुए तत्काल पद से इस्तीफा देने की मांग की है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने बुधवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जिस व्यक्ति के कारण 13 करोड़ से अधिक लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाये गये हैं उसे संवैधानिक पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और उसे तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज और विभिन्न फैसलों पर 14 बार लिखित विरोध और असहमति दर्ज करायी है लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया जाता है। श्री सिंघवी ने कहा कि 1995 में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त अन्य चुनाव आयुक्तों से ऊपर नहीं हैं और तीनों समान हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त 'फर्स्ट अमंग इक्वल्स' यानी बराबरों में प्रथम हैं। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने चुनाव आयोग को बहुसदस्यीय संस्था बताते हुए कहा था कि सभी चुनाव आयुक्तों की निर्णय प्रक्रिया में भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगस्त 2026 में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने फॉर्म-6 में किये गये बदलावों को 'अनधिकृत और अवैध' बताया था जबकि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने भी इसका विरोध किया था। मई 2026 में दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस बात पर आपत्ति जतायी थी कि उनके निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को चुनाव आयोग के पोर्टल तक पहुंच नहीं दी गयी। अगस्त में श्री संधू ने यह भी सवाल उठाया था कि पश्चिम बंगाल ट्रिब्यूनल के समक्ष चुनाव आयोग की ओर से अपील दायर करने की अनुमति किसने दी।

श्री सिंघवी ने कहा कि इन परिस्थितियों में सवाल उठता है कि क्या अन्य चुनाव आयुक्तों को केवल 'डमी' बना दिया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त पर अपने सहयोगियों के अधिकार छीनने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त मनमानी करते हैं और देश में वोट चोरी का जरिया बनते हैं। उनका कहना था कि कि चुनाव आयोग देशभर में 'एक व्यक्ति, एक महिला और एक वोट' की बात करता है लेकिन उसने खुद को ऐसी संस्था बना लिया है जहां 'न किसी का वोट और ना ही किसी का मूल्य' रह गया है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि उच्चतम न्यायालय का 1995 का फैसला लिखित विरोध और संवैधानिक जवाबदेही सब कूड़ेदान में डाल दिये गये हैं। फॉर्म-6 में किये गये बदलावों पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने लिखा था कि उनकी सहमति नहीं थी।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को अपने सभी लिखित असहमति पत्र देश के सामने रखने चाहिए। श्री सिंघवी ने कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने यह भी बताया था कि हजारों निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को चुनाव आयोग के पोर्टल तक पहुंच नहीं मिल रही थी। श्री सिंघवी ने पश्चिम बंगाल में सामने आये 38 लाख मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 23 लाख अपील में गये और इनमें 90 प्रतिशत सफलता मिली जबकि करीब 16 लाख अपील स्वयं चुनाव आयोग ने की। उन्होंने कहा कि एसआईआर के पहले और दूसरे चरण में 7.8 करोड़ मतदाता हटाये गये थे तथा तीसरे चरण में अब तक 6.18 करोड़ नाम हटाये गये और 5.43 करोड़ मतदाताओं को संदिग्ध बताते हुए अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के नोटिस दिये गये हैं।

उन्होंने कहा कि इन खुलासों के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा दे देना चाहिए और उन्हें पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष पिछले कई वर्षों से चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहा है लेकिन उसकी बातों को नजरअंदाज किया जाता है। अब चुनाव आयोग के भीतर से ही दो चुनाव आयुक्तों की ओर से 14 बार आपत्ति दर्ज किये जाने की बात सामने आयी है। उन्होंने फॉर्म-6 के कथित दुरुपयोग, सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े सवाल उठाये। श्री खरगे ने कहा कि पहले तीन चरणों की एसआईआर प्रक्रिया में 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूचियों से 13.8 करोड़ नाम हटाये गये हैं।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी द्वारा उठाये गये 'वोट चोरी' और एसआईआर से जुड़े सवाल अब सही साबित हो रहे हैं। उनका कहना था कि गत 24 अप्रैल को विपक्ष के 73 राज्यसभा सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए राज्यसभा के महासचिव को नया पदच्युति प्रस्ताव नोटिस दिया था और अब यह सवाल है कि जब मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं हुआ है तो राज्यसभा के सभापति इस लंबित नोटिस पर क्या निर्णय करेंगे। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि 'वोट चोरी' देश की जनता के खिलाफ अपराध और संविधान पर सीधा हमला है।

पार्टी के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने श्री कुमार को पद पर बने रहने का अधिकार नहीं होने की बात कहते हुए तत्काल हटाने और उच्चतम न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की। पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि राहुल गांधी लगातार चुनाव आयोग की निष्पक्षता और अन्याय से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं और अब स्वयं चुनाव आयुक्तों ने श्री कुमार के समक्ष अपनी चिंताएं रखी हैं। उन्होंने कहा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त को इसकी जानकारी थी और उन्होंने इसे होने दिया तो यह गंभीर विषय है तथा इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने श्री कुमार पर चुनाव आयोग को भीतर से कमजोर करने और करोड़ों लोगों को मताधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने श्री कुमार पर चुनाव आयोग को भीतर से कमजोर करने और करोड़ों लोगों को मताधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया है।

अभिनव जितेन्द्र वार्ता

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यूआरएल स्लग:
कांग्रेस लीड वोट चोरी संविधान हमला
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
23/09/26 09:31
पिछला अपडेट
23/09/26 09:31
स्थान
India