नयी दिल्ली, 28 सितंबर (वार्ता) कांग्रेस ने कहा है कि चुनाव आयोग को समझ लेना चाहिए कि वह भारत के नागरिकों की नागरिकता तय करने वाला संस्थान नहीं है।
कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि उच्चतम न्यायालय के पिछले वर्ष सेवानिवृत्त हुए न्यायाधीश सुधांशु धूलिया ने एक अंग्रेजी अखबार में स्पष्ट रूप से कहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसएआर) प्रक्रिया के तहत नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम या संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं है।
नागरिकता का निर्धारण संसद द्वारा समय-समय पर संशोधित नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत होता है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे मुख्य चुनाव आयुक्त ने नागरिकता और अन्य मुद्दों पर जानबूझकर और स्पष्ट रूप से संविधान का उल्लंघन किया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने जेन-जेड मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के लिए भी फॉर्म-6 में अवैध बदलाव किया है।
श्री रमेश ने कहा कि लोकतंत्र को खत्म कर दिया गया है और इसको फिर से हासिल करने की लंबी यात्रा में पहला कदम मुख्य निर्वाचन आयुक्त का इस्तीफा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के लिए मोर्चे के रूप में काम कर रहे हैं और संविधान के लिए अपमान हैं।
अभिनव.श्रवण वार्ता