'विकसित भारत' के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका: वेंकैया नायडू

नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर (वार्ता) पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा है कि 2047 तक 'विकसित भारत' की यात्रा, शासन एवं आर्थिक प्रगति के साथ-साथ नागरिकों की भागीदारी पर भी निर्भर करती है।
श्री नायडू ने 'भारत की सोच' की प्रमुख चर्चा श्रृंखला 'मंत्रणा' में गुरूवार को मुख्य भाषण देते हुए इस बात पर बल दिया कि राष्ट्र-निर्माण का दारोमदार केवल सरकार पर नहीं छोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा, "नीतियां एक दृष्टिकोण देती हैं लेकिन नागरिकों के काम ही निर्धारित करते हैं कि परिणाम कितनी तेज़ी से मिलेंगे और कितने सफल होंगे।"
उन्होंने कहा कि जहां सरकार को प्रभावी शासन, अवसंरचना एवं विकास के अवसर उपलब्ध कराने चाहिए, वहीं नागरिकों की भी बराबर ज़िम्मेदारी है कि वे संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखें और अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन करें। एक विकसित भारत की व्यापक आकांक्षाओं पर बल देते हुए श्री नायडू ने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि 2047 तक कहीं भी भूख, अत्याचार, भेदभाव या असमानता न रहे। सच्ची प्रगति केवल आर्थिक पैमानों से ही नहीं बल्कि सामाजिक भलाई, समानता और एकता से झलकती है।"
राष्ट्र-निर्माण के मुख्य आधारों पर विस्तार से चर्चा करते हुए, उन्होंने सच्ची देशभक्ति को प्रत्येक नागरिक द्वारा पूरी निष्ठा से अपना कर्तव्य निभाना बताया और देश के युवाओं से बड़े सपने देखने, कड़ी मेहनत करने तथा राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। 'भारत की सोच' के अध्यक्ष अनिल राजपूत ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण को नागरिक जिम्मेदारी और व्यक्तिगत जवाबदेही की एक मजबूत भावना का समर्थन मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा "हम अक्सर विकसित भारत को उसके अवसंरचना, विकसित व्यवसायों, उन्नत प्रौद्योगिकियों एवं आधुनिक शहरों के आधार पर मापते हैं। हालाँकि ये चीजें जरूरी हैं, लेकिन हम हर दिन जो चुनाव करते हैं, उसी से तय होता है कि हम इस प्रगति का कितना पूरा लाभ उठा पाते हैं। सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान करना, पर्यावरण की रक्षा करना, नियमों का पालन करना और ईमानदारी से काम करना ये केवल व्यक्तिगत कार्य नहीं हैं; इनसे उस समाज का निर्माण होता है जिसे हम सब मिलकर बनाते हैं। 'विकसित भारत' की ओर हमारा सफर तब आगे बढ़ेगा जब जिम्मेदार नागरिकता हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन जाएगी।"
अभय जितेन्द्र वार्ता

