नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (वार्ता) भारत ने राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के बारे में कुछ दिन पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के बयान को एक बार फिर खारिज करते हुए कहा है कि यदि इस तरह की संस्थाएं दोहरा मानदंड अपनाते हुए चुनिंदा मामलों में प्रतिक्रिया करेंगी तो देशों का बहुपक्षवाद में भरोसा कम हो जाएगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को यहां मीडिया ब्रीफिंग में राजधानी दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों के बारे में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की टिप्पणी के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि इस संस्था की चिंता अनुचित हैं और भारत को मंजूर नहीं है क्योंकि यह भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के समान है।
उन्होंने कहा कि यह संस्था जिस तरह से चुनिंदा मामलों में प्रतिक्रिया करती है और कुछ अन्य देशों में होने वाली घटनाओं को नजरंदाज करती है। इस तरह के रवैये से बहुपक्षवाद में देशों का भरोसा कम हो जाएगा। प्रवक्ता ने कहा , " ऐसा लगता है कि उनका रवैया बहुत चुनिंदा है क्योंकि उन्होंने दुनिया के अन्य हिस्सों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों या कानून प्रवर्तन कार्रवाइयों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं की है। और अगर यह रवैया जारी रहता है तो इससे बहुपक्षवाद में विश्वास कम हो जाऐगा। साथ ही, यह एक संगठन के रूप में उनकी विश्वसनीयता को कमजोर करता है।"
उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने कहा था कि वह दिल्ली में शनिवार को बड़े पैमाने पर होने वाले प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान, प्रदर्शनकारियों, विरोध प्रदर्शनों के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को बड़े पैमाने पर हिरासत में लिए जाने की रिपोर्टों को लेकर चिंतित हैं।
संजीव जितेन्द्र वार्ता