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नवरात्रि में भक्तों से गुलजार है सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी

भदोही 02 अप्रैल (वार्ता) वासंतिक नवरात्रि में जहां विंध्याचल जैसे देवी के सिद्धपीठों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा। वहीं जननी मां सीता के समाहित स्थल वाल्मीकि आश्रम सीतामढ़ी में भी भक्तों की तादाद अचानक बढ़ गई है।
सनातन धर्म में नवरात्रि का अपना विशेष महत्व है। वर्ष में दो बार आने वाले शारदीय व वासंतिक नवरात्रि में हर भक्त देवी मंदिरों व सिद्ध पीठों में पहुंच कर मां भगवती के दर्शन कर इच्छित कामनाओं की पूर्ति करता है। वासंतिक नवरात्रि में देवी मंदिरों में लाखों श्रद्धालु माथा टेकने पहुंच रहे हैं, वहीं सीतामढ़ी में भी मां भवानी सीता के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ अचानक बढ़ गई है। काशी-प्रयाग व विंध्याचल जैसे तीर्थ स्थलों की हृदय स्थली सीतामढ़ी धाम त्रेता युगीन गाथाओं को संजोए अनेकों धार्मिक एवं पौराणिक मान्यताओं की साक्षी है। जहां नवरात्रि में भक्तों का तांता लग रहा है।
भदोही जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर भागीरथी के तट पर अवस्थित वाल्मीकि आश्रम व सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी नवरात्रि के महीने में पूरी तरह गुलजार है। जहां विंध्यधाम से मां का दर्शन कर लौटने वाले हजारों श्रद्धालु भवानी सीता के दर्शन पूजन के लिए पहुंचकर माथा टेक रहे हैं। नवरात्रि में भगवान महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली सीतामढ़ी की पावन भूमि श्रद्धालुओं के आस्था और विश्वास का केंद्र बनी है।
सीतामढ़ी में दो मंजिला ऐसा भव्य मंदिर है जिसमें दोनों तल में सिर्फ माता-सीता की अलग-अलग मुद्राओं में दिव्य एवं भव्य मूर्ति की स्थापित है। प्रथम तल में भगवती सीता की प्रणाम मुद्रा में अत्यंत ही मनोहारी दिव्य मूर्ति है जिसके दर्शन मात्र से रोम रोम रोमांचित हो जाता है। इसी तरह मंदिर के निचले तल में माता रानी की भू-प्रवेश की मुद्रा में दुर्लभ मूर्ति स्थापित है। नवरात्रि में मंदिर में सुबह शाम की भव्य आरती में शामिल होने के लिए दूर दूर से पहुंचे श्रद्धालु मंदिर के निचले तल के गर्भगृह के बड़े हाल में एकाग्रता पूर्वक ध्यान लगाते हैं। कहा जाता है कि ध्यान के दौरान धरती से आध्यात्मिक तरंगित कंपन का आभास होता है। जो दैवीय शक्ति का संदेश है।
सं सोनिया
वार्ता