भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान के दिवालापन पर स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में व्यावहारिक सहयोग करेगा एआरसी संघ
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (वार्ता) कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त निकाय भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) ने दिवाला विषय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम (पीजीआईपी) में उद्योग जगत के साथ सहयोग के विस्तार के लिए एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (एआरसी) के संघ के साथ के साथ बुधवार को एक करार पर हस्ताक्षर किये।
एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियां बैंकों के डूबे ऋण खातों को सस्ते में खरीद कर उनकी वसूली करती है।इन्हें रिजर्व बैंक से लाइसेंस मिलता है। आईआईसीए की एक विज्ञप्ति के अनुसार इस पाठ्यक्रम में उद्योग जगत के साथ संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एआरसी संघ के समझौता किया गया है। आईआईसीए के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्ञानेश्वर कुमार सिंह की उपस्थिति में इस पर संस्थान की ओर से मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अमरिंदर पुरी तथा एआरसी संघ की ओर से उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरि हरा मिश्रा ने हस्ताक्षर किए।
पाँच वर्षों की अवधि के लिए हस्ताक्षरित इस समझौता के अनुसार दोनों संस्थान निर्धारित कार्यान्वयन रणनीतियों, सहयोगात्मक अनुसंधान, विशेषज्ञों द्वारा शिक्षण तथा प्रगति की नियमित समीक्षा के माध्यम से इस दिवाला विषय पर इस पाठ्यक्रम को और समृद्ध बनायेंगे। इससे इस पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक ज्ञान और उद्योग जगत के व्यावहारिक अनुभव के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है। इससे प्रतिभागियों को दिवाला समाधान, कॉरपोरेट पुनर्गठन तथा वित्तीय संकट प्रबंधन की जटिलताओं का अधिक प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए तैयार करने में ममद मिलने की उम्मीद है।
दोनों संस्थानों के बीच इस सहयोग के अंतर्गत उद्योग जगत के विशेषज्ञों एवं पेशेवरों को संकाय सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। संकटग्रस्त परिसंपत्तियों (वसूली में फंसे ऋणों) पर दोनों ओर से मिल कर अनुसंधान किया जाएगा तथा दोनों के बीच सूचनाओं को साझा किया जाएगा। इसके अलावा दोनों संस्थान इस पाठ्यक्रम से निकलने वालों के लिए नौकरी एवं रोजगार के अवसरों से जोड़ने में सहायता प्रदान करेंगे और प्रतिवर्ष संयुक्त सम्मेलन का आयोजन करेंगे। इसके तहत अगले साल फरवरी में एक संयुक्त सम्मेलन आयोजित करने की संभावना पर भी विचार किया गया है।
एआरसी संघ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीईओ हरि हरा मिश्रा ने कहा कि यह एक उभरती हुई साझेदारी है, जिसमें असाधारण संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा कि संकटग्रस्त परिसंपत्तियों का बाजार जिस प्रकार विकसित हो रहा है, उसे देखते हुए प्रतिभाओं की एक सशक्त फौज तथा अनुसंधान से प्राप्त सूचनाओं का महत्व बढ़ जाता है। पारिस्थितिकी तंत्र के सभी हितधारकों के लिए मूल्य अधिकतम करने में ऐसी पहलों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
आईआईसीए के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सिंह ने दिवाला समाधान व्यवस्था में एआरसी कंपनियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया । उन्होंने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता के अंतर्गत समाधान के लिए आवेदन करने वाली इकाइयों के रूप में एआरसी की पात्रता और भागीदारी सहित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
मनोहर जितेन्द्र वार्ता

