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सुप्रीम कोर्ट ने रेवंत रेड्डी के 'कोई उपचुनाव नहीं होगा' वाले बयान पर जताई आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने रेवंत रेड्डी के 'कोई उपचुनाव नहीं होगा' वाले बयान पर जताई आपत्ति

नयी दिल्ली, 02 अप्रैल (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की ओर से सदन में दिए गए इस बयान पर कि अगर भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के विधायक कांग्रेस में शामिल होते हैं तो भी उपचुनाव नहीं होंगे, पर बुधवार को कड़ी आपत्ति जताई।

न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सदन में मुख्यमंत्री के इस बयान के लिए उनकी खिंचाई की।पीठ ने कहा, "यदि यह सदन में कहा जाता है तो आपके माननीय मुख्यमंत्री दसवीं अनुसूची का मजाक उड़ा रहे हैं। "रामलीला मैदान" में राजनेताओं द्वारा कही गई बात सदन में कही गई बात से अलग है।”

पीठ ने कहा, "जब राजनेता विधानसभा में कुछ कहते हैं तो उसमें कुछ पवित्रता होती है। वास्तव में निर्णय/ निर्णयों में कहा गया है कि जब हम कानूनों की व्याख्या करते हैं, तो सदन में भाषण देने वाले माननीय मंत्री के बयान का उपयोग उस कानून की व्याख्या के लिए किया जा सकता है।"

विधायी कार्यवाही पर न्यायिक जांच से संवैधानिक रूप से गारंटीकृत प्रतिरक्षा का हवाला देते हुए बीआरएस से कांग्रेस में शामिल होने वाले 10 पार्टी विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई थी, इस पर उन्होंने यह स्पष्ट किया कि राज्य में कोई उपचुनाव नहीं होगा।

श्री रेड्डी ने 27 मार्च को कथित तौर पर यह बयान राज्य विधानसभा में 2025-26 के लिए अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विपक्षी विधायकों द्वारा उठाई गई चिंताओं का जवाब देते हुए दिया।

शीर्ष न्यायालय बीआरएस नेताओं केटी रामा राव और पाडी कौशिक रेड्डी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस के प्रति निष्ठा रखने वाले 10 विधायकों के खिलाफ लंबित अयोग्यता कार्यवाही पर तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष द्वारा समय पर कार्रवाई की मांग की गई थी।

पीठ ने मुख्यमंत्री को यह भी याद दिलाया कि उन्होंने पहले भी कुछ इसी तरह का बयान दिया था। श्री रेड्डी ने पिछले साल अगस्त में बीआरएस नेता के कविता और आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया को कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मामलों में जमानत दिए जाने के मुद्दे पर बयान दिया था।

मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर सवाल उठाया था कि कविता को पांच महीने में जमानत कैसे मिल गई, जबकि श्री सिसोदिया को 15 महीने बाद जमानत मिली और (दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री) अरविंद केजरीवाल को अभी तक जमानत नहीं मिली है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश (बुधवार को सुनवाई के दौरान) वरिष्ठ अधिवक्ता आर्यमा सुंदरम ने अदालत को तेलंगाना के मुख्यमंत्री के बयानों से अवगत कराया।

तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी अदालत में मौजूद थे। अदालत ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा, क्योंकि उसने पाया कि वह सुश्री कविता और श्री सिसोदिया को जमानत दिए जाने के अपने कथित बयान से संबंधित एक अन्य मामले में पहले भी मुख्यमंत्री की ओर से पेश हुए थे।

श्री रोहतगी ने कहा कि वे पीठ के समक्ष मुख्यमंत्री की ओर से पेश नहीं हो रहे हैं और उन्होंने दलील दी कि वर्तमान मामले में विधानसभा की कार्यवाही प्रश्नगत नहीं है।

पीठ ने कहा, "हम चाहते हैं कि श्री रोहतगी मुख्यमंत्री को यह संदेश दें कि कोई "दोहराई गई कार्रवाई" नहीं होगी।"

पीठ ने चेतावनी देते हुए कहा,“ अवमानना ​​नोटिस जारी करने में वह भले ही धीमी हो, लेकिन वह "शक्तिहीन नहीं है"।

न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि विधानसभा अध्यक्ष कोई कार्रवाई नहीं करते हैं, तो इस देश की अदालतें, जिनके पास न केवल शक्ति है, बल्कि संविधान के संरक्षक के रूप में उनका कर्तव्य भी है, शक्तिहीन नहीं होंगी।

बीरेंद्र,आशा

वार्ता

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