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‘भारत थाईलैंड ने कायम की रणनीतिक साझीदारी, मानव तस्करी के खिलाफ मिल कर काम करेंगे’

‘भारत थाईलैंड ने कायम की रणनीतिक साझीदारी, मानव तस्करी के खिलाफ मिल कर काम करेंगे’

बैंकॉक 03 अप्रैल (वार्ता) भारत और थाईलैंड ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझीदारी का रूप देने के साथ सुरक्षा एजेंसियों के बीच रणनीतिक संवाद शुरू करने, मानव तस्करी और अवैध उत्प्रवासन के खिलाफ मिल कर काम करने की घोषणा की है तथा डिजीटल एवं उच्च प्रौद्योगिकियों, लघु एवं मध्यम उद्यमों, हथकरघा एवं हस्तशिल्प के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जतायी है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और थाईलैंड की प्रधानमंत्री यिंगलक शिन्नावात के बीच गुरुवार को यहां हुई द्विपक्षीय बैठक में ये निर्णय लिये गये। दोनों देशों ने आपसी सहयोग के छह समझौतों पर हस्ताक्षर एवं आदान करने के साथ ही हिन्द प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र, खुले, समावेशी एवं नियम आधारित नौवहन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी। भारत ने आसियान की एकता और आसियान की केन्द्रीयता का पूर्ण समर्थन दोहराया।

दोनों देशों ने जिन समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं, उनमें भारत-थाईलैंड रणनीतिक साझीदारी की स्थापना पर संयुक्त घोषणा, डिजिटल प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग पर थाईलैंड साम्राज्य के डिजिटल अर्थव्यवस्था और समाज मंत्रालय तथा भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन, भारत के बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सागरमाला प्रभाग और थाईलैंड साम्राज्य के संस्कृति मंत्रालय के ललित कला विभाग के बीच गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (एनएमएचसी) के विकास के लिए समझौता ज्ञापन, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के क्षेत्र में सहयोग पर भारत के राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड (एनएसआईसी) और थाईलैंड साम्राज्य के लघु और मध्यम उद्यम संवर्धन कार्यालय (ओएसएमईपी) के बीच समझौता ज्ञापन, भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीओएनईआर) और थाईलैंड साम्राज्य के विदेश मामलों के मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन तथा भारत के उत्तर पूर्वी हस्तशिल्प और हथकरघा विकास निगम लिमिटेड (एनईएचएचडीसी) और थाईलैंड सरकार की क्रिएटिव इकोनॉमी एजेंसी (सीईए) के बीच समझौता ज्ञापन शामिल हैं।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने प्रेस वक्तव्य में थाईलैंड में उनके एवं भारतीय प्रतिनिधिमंडल के आतिथ्य के लिए प्रधानमंत्री शिन्नावात का आभार व्यक्त किया। उन्होंने 28 मार्च को आए भूकंप में हुई जनहानि के लिए भारत के लोगों की ओर से गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं और, घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और थाईलैंड के सदियों पुराने संबंध हमारे गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सूत्रों से जुड़े हैं। बौद्ध धर्म के प्रसार ने हमारे जन-जन को जोड़ा है। अयुत्थया से नालंदा तक विद्वानों का आदान-प्रदान हुआ है। रामायण की कथा थाई लोक-जीवन में रची-बसी है। और, संस्कृत-पाली के प्रभाव आज भी भाषाओं और परंपराओं में झलकते हैं।

उन्होंने कहा, “मैं थाईलैंड सरकार का आभारी हूँ कि मेरी यात्रा के उप्लक्ष्य में 18वी शताब्दी की ‘रामायण’ म्यूरल पेंटिंग्स पर आधारित एक विशेष डाक-टिकट जारी किया गया है। प्रधानमंत्री शिन्नावात ने अभी मुझे त्रिपिटक भेंट की। बुद्ध-भूमि भारत की ओर से मैंने इसे हाथ जोड़ कर स्वीकार किया है। पिछले वर्ष, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष को भारत से थाईलैंड भेजा गया। यह बहुत खुशी की बात है कि चार मिलियन से अधिक श्रद्धालुओं को दर्शन करने का अवसर मिला। मुझे यह घोषणा करते हुए अत्यंत खुशी है कि 1960 में गुजरात के अरावली में मिले पवित्र अवशेष को भी थाईलैंड दर्शन के लिए भेजा जाएगा। इस वर्ष भारत में महाकुंभ में भी हमारा पुराना कनेक्शन दिखाई दिया। थाईलैंड समेत अन्य देशों से, 600 से अधिक बौद्ध श्रद्धालु इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक सभा का हिस्सा बने। इस आयोजन ने वैश्विक शांति और सामंजस्य का संदेश दिया।”

श्री मोदी ने कहा कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और हमारे हिन्द प्रशांत क्षेत्र के विज़न में थाईलैंड का विशेष स्थान है। आज हमने अपने संबंधों को रणनीतिक साझीदारी का रूप देने का निर्णय लिया है। सुरक्षा एजेंसियों के बीच ‘रणनीतिक संवाद’ स्थापित करने पर भी चर्चा की। साइबर अपराधों के शिकार भारतीयों को वापस भारत भेजने में थाईलैंड सरकार से मिले सहयोग के लिए, हमने थाईलैंड सरकार का आभार प्रकट किया। हम सहमत हैं कि हमारी एजेंसियां मानव तस्करी और अवैध उत्प्रवासन के खिलाफ एकजुट होकर काम करेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों और थाईलैंड के बीच पर्यटन, संस्कृति एवं शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग पर बल दिया है। आपसी व्यापार, निवेश और कारोबारों के बीच आदान प्रदान बढ़ाने पर हमने बात की। सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों, हथकरघा और हस्तशिल्प में भी सहयोग के लिए समझौते किए गए हैं। नवीकरणीय ऊर्जा, डिजीटल तकनीक, इलैक्ट्रिक वाहनों, रोबॉटिक्स, स्पेस, जैव प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप्स में सहयोग को बढ़ाने का हमने निर्णय लिया है। परिवहन कनेक्टिविटी के साथ-साथ, दोनों देशों के बीच फिनटेक कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भी काम किया जायेगा। लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, भारत ने थाई पर्यटकों के लिए मुफ्त ई-वीज़ा सुविधा देनी शुरू कर दी है।

श्री मोदी ने कहा कि आसियान भारत का समग्र रणनीतिक साझीदार है। और इस क्षेत्र में, समुद्री पड़ोसी देशों के नाते, क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि में हमारे साझा हित हैं। भारत आसियान की एकता और आसियान की केन्द्रीयता का पूर्ण समर्थन करता है। हिन्द प्रशांत क्षेत्र में, स्वतंत्र, खुले, समावेशी एवं नियम आधारित व्यवस्था का हम दोनों समर्थन करते हैं। हम विस्तार-वाद नहीं, विकास-वाद की नीति में विश्वास रखते हैं। हिन्द प्रशांत महासागरीय पहल के ‘समुद्री पारिस्थितकी’ के मुद्दे का सह नेतृत्व करने के थाईलैंड के निर्णय का हम स्वागत करते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, “कल बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए मैं उत्सुक हूं। थाईलैंड की अध्यक्षता में इस फोरम के अंतर्गत क्षेत्रीय सहयोग को नई गति मिली है।”

सचिन

वार्ता