नयी दिल्ली, 02 अप्रैल (वार्ता) राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को ‘नृत्य शिखर महोत्सव’ के भव्य समापन समारोह के अवसर पर शास्त्रीय नृत्य के उत्कृष्ट कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुति दी।
इस महोत्सव को उर्वशी डांस म्यूज़िक आर्ट एंड कल्चरल सोसाइटी ने संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया था।
महोत्सव की शुरुआत ‘रिपर्टरी उर्वशी’ के समूह नृत्य, शोभा बिष्ट के ओडिसी नृत्य से हुई। उनकी पहली प्रस्तुति ‘पल्लवी’ (राग गुणकारी, ताल त्रिपुटा) थी, जिसे गुरु माधवी मुद्गल द्वारा कोरियोग्राफ किया गया, जो गुरु गोपाल चंद्र पांडा द्वारा और लय संरचना गुरु बनमाली महाराणा द्वारा रचित थी। इस प्रस्तुति ने ओडिसी नृत्य की वास्तुशिल्पीय सुंदरता को मंच पर सजीव कर दिया।
इसके अलावा, गीत गोविंद से अष्टपदी का मंचन हुआ, जिसमें राधा की विरह व्यथा को अत्यंत कोमलता और गहनता से व्यक्त किया गया। इस रचना में गुरु माधवी मुद्गल की नृत्य-शैली और मधुप मुद्गल के संगीत ने दर्शकों को राधा-कृष्ण के आध्यात्मिक प्रेम में डुबो दिया।
कथक नृत्य के उस्ताद विशवदीप की ‘चतुरंग’ (राग यमन) प्रस्तुति को गुरु शामा भाटे ने कोरियोग्राफ किया। इसमें ‘श्याम बजाए ऐसी मुरलिया, हरत सुध-बुध गोपी ग्वालन रसिया’ जैसी प्रस्तुति दी।
इसके बाद, एक विचारोत्तेजक प्रस्तुति ‘अंतरध्वंद्व: रावण का द्वंद्व’ नृत्य नाटिका को गुरु शामा भाटे ने कोरियोग्राफ किया।
आज की शाम को और रंगारंग बनाने के लिए तपस्या फाउंडेशन के कलाकारों ने छऊ नृत्य शैली में ‘डांडी’ नामक एक प्रभावशाली नृत्य प्रस्तुत किया। यह नृत्य ‘ब्रतोपायन’—यानी उपनयन संस्कार को चित्रित करता है, जो ब्रह्मचर्य में प्रवेश की प्रतीकात्मक विधि है। गुरु अजय भट्ट के शिष्य अभिषेक, अनुराग और विशाल ने इस नृत्य में शक्ति, अनुशासन और भक्ति का शानदार संगम प्रस्तुत किया।
इसके अलावा, प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना अमीरा पाटणकर ने शिव वंदना (राग तोड़ी) से अपने प्रदर्शन की शुरुआत की, जिसमें भगवान शिव के तांडव की दिव्य ऊर्जा को साकार किया गया। इसके पश्चात, उन्होंने ‘ताल रास’ (13 मात्राएँ) में अपनी विलक्षण लयकारी और घूमरों से दर्शकों को सम्मोहित कर दिया। उनकी अंतिम प्रस्तुति ‘अहिल्या’ थी, जो अहिल्या के उद्धार की पौराणिक कथा का समकालीन व्याख्यान था। गुरु शामा भाटे द्वारा कोरियोग्राफ इस प्रस्तुति में अभिनय (अभिनया) और भावनात्मक अभिव्यक्ति का अद्भुत संयोजन देखने को मिला।
महोत्सव के दौरान भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत में योगदान देने वाले प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों में से पं. विजय शंकर मिश्रा को ‘उर्वशी कला शिखर सम्मान’, अशोक जमनानी को ‘उर्वशी कला गौरव सम्मान’, अशोक जैन को ‘उर्वशी कला उत्थान सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
श्रद्धा.संजय
वार्ता