राज्य » बिहार / झारखण्डPosted at: Mar 21 2025 5:22PM पुस्तक लेखन के क्षेत्र में नवाचार और नए विचारों की जरूरत : शरणदरभंगा 21 मार्च (वार्ता) पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अंजनी कुमार शरण ने पुस्तक लेखन के क्षेत्र में नवाचार और नए विचारों को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल देते हुए शुक्रवार को कहा कि लेखन का क्षेत्र चुनौतियों से भरा है। श्री शरण ने दरभंगा व्यवहार न्यायालय प्रांगण स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार भवन में शुक्रवार को आईआईटीएन से अधिवक्ता बने धनंजय मोदगल्य द्वारा लिखित तथा भारत एपेक्स पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित 111 पुस्तकों के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को पुस्तक लेखन के क्षेत्र में आगे आने की जरूरत है और उन्हें अपने विचारों और अनुभवों को साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आज ऐतिहासिक दिन है कि मिथिला मंडन मिश्र की पावन भूमि है जिसका ज्वलंत उदाहरण धनंजय द्वारा 111 पुस्तकों का लिखना इस बात को चरितार्थ करता है। दरभंगा व्यवहार न्यायालय के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार तिवारी ने कहा कि दरभंगा के वकील ने 111 पुस्तक लिखकर बार एसोसिएशन समेत दरभंगा न्याय मंडल का मान बढ़ाया। उन्होंने कहा कि पुस्तक लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्टता को बढ़ावा देना और इसे एक महत्वपूर्ण और सम्मानित पेशा बनाना जरूरी है। कार्यक्रम में लोकार्पित पुस्तकों में विधि शास्त्र की बारीकियों, वकीलों का कर्तव्य, साहित्य, शिक्षा, आध्यात्म, और आत्मविकास से जुड़े विषयों को समर्पित पुस्तकों का अनावरण हुआ। युवा लेखक के इस अनोखी पहल का उद्देश्य भारतीय ज्ञान, चेतना और प्रेरणा को सरल भाषा और आधुनिक शैली में जन-जन तक पहुँचाना है। इन पुस्तकों के लेखक ने यह कार्य एक व्यक्तिगत संकल्प और साहित्यिक तपस्या के रूप में किया, जिसे लोकार्पण के बाद अब वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है। कार्यक्रम में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रविशंकर प्रसाद, महासचिव कृष्ण कुमार मिश्रा, दरभंगा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव रंजनदेव, एसीजेएम करुणानिधि प्रसाद आर्य, मोहिनी कुमारी, वरीय अधिवक्ता अरुण कुमार सिन्हा अमर, जीतेंद्र नारायण झा, चन्द्रधर मल्लिक, पूर्व लोक अभियोजक विनय कुमार सिंह, न्यायिक पदाधिकारी, कर्मी और बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित थे । भारत एपेक्स पब्लिशर्स के निदेशक ने बताया कि यह लोकार्पण केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं बल्कि विचारों और मूल्यों के पुनर्जागरण का एक आंदोलन है। पटना गांधी मैदान में 21 मार्च से 27 मार्च तक आयोजित पुस्तक मेला में लोकार्पण पश्चात सभी 111 पुस्तक उपलब्ध रहेगी। इस अवसर पर पुस्तकों के लेखक धनंजय मोदगल्य ने कहा कि हर पुस्तक एक बीज है – सोच का, बदलाव का और चेतना का। मेरा उद्देश्य है कि ये विचार समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनें। पुस्तकों के लेखक धनंजय मोदगल्य आईआईटी मुंबई से स्नातक की डिग्री लेकर विदेश की कंपनी में नौकरी करने के बाद अधिवक्ता बने हैं। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार चौधरी ने किया।सं.सतीशवार्ता