राज्य » बिहार / झारखण्डPosted at: Apr 1 2025 11:11PM मंत्री ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली का आपस में गहरा संबंध है। जल के बिना जीवन की कल्पना असंभव है और हरियाली जल तथा पर्यावरण संतुलन को बनाये रखने में सहायक होती है। 20 नवम्बर 2019 को राज्य में एक नयी शुरूआत की गयी जब माननीय मुख्यमंत्री जी के द्वारा जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम की शुरूआत 08 जिलों के लिए की गयी थी। जैसा मौसम वैसा फसल चक्र के सूत्र वाक्य के साथ मुख्यमंत्री के द्वारा देश और दुनिया को एक नया संदेश दिया गया। बिहार में चलाये जा रहे जल-जीवन-हरियाली अभियान की चर्चा आज भारत में ही नहीं, पूरे विश्व में हो रही है। वर्तमान में वर्षा की अनियमितता, तापमान में परिवर्तन, भू-जल का स्तर गिरने से फसलों की उत्पादकता में ह्रास हो रहा है। इसलिए इस योजना की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है। श्री सिन्हा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से होने वाले संकट से बचने के लिए हमे तैयार रहना होगा। इससे जुड़ी हुई योजनाओं का शत्-प्रतिशत लाभ किसानों तक पहुँचाना होगा, जिससे किसानों के जीवन-स्तर में सुधार हो सके तथा फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि हो सके। उन्होंने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान में कृषि विभाग के साथ ग्रामीण विकास विभाग, शिक्षा विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, लघु जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, जल संसाधन विभाग, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, ऊर्जा विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, पंचायती राज विभाग, भवन निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग प्रत्यक्ष रूप से और राज्य सरकार के सभी विभाग अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि यह अभियान जल संरक्षण, हरित क्षेत्र के विस्तार और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए 15 विभागों के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए जल-जीवन-हरियाली अभियान की शुरूआत की गई है। वर्तमान समय में जल संकट, पर्यावरणीय असंतुलन और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों को देखते हुए यह पहल अत्यंत आवश्यक एवं प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत सार्वजनिक जल संरचनाओं, तालाब, पोखर, कुआं, नदी, नाला, आहर, पाइन के जीर्णोंद्धार के साथ-साथ नये जल-स्रोतों का सृजन किया जा रहा है। सरकारी भवनों की छत पर वर्षा जल के संचयन तथा सौर ऊर्जा को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। श्री सिन्हा ने कहा कि कृषि विभाग द्वारा कई योजनाएं इस अभियान में सम्मिलित किया गया है। जैविक खेती आज के समय की मांग है। जैविक खेती में उर्वरक एवं रसायनों का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसके उत्पाद स्वास्थ्यवर्द्धक होते हैं। जैविक खेती को बढ़ावा देने एवं किसानों के आय में वृद्धि तथा उन्हें उचित बाजार एवं विपणन की व्यवस्था के लिये बिहार राज्य जैविक मिशन का गठन किया गया है। यह योजना जल-जीवन हरियाली अभियान के अन्तर्गत एक महत्वाकांक्षी पहल है। जैविक कोरिडोर जिलो में मुख्य रूप से सब्जी की खेती की जाती है। इसके अतिरिक्त विशिष्ट फसलों यथा- काला गेहूं, कतरनी चावल, बैगनी, पीले एवं हरे रंग का फूलगोभी, ब्रोकली, लाल, पीला एवं हरा शिमला मिर्च, ड्रैगन फूट की खेती की जा रही है।प्रेम सूरजजारी वार्ता