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रंगमंच पर गोवन संस्कृति की धारा समई फगुडी नें रंग बिखेरे

उदयपुर 24 दिसम्बर(वार्ता) राजस्थान के उदयपुर में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित राष्ट्रीय हस्तशिल्प एवं लोक कला उत्सव ‘‘शिल्पग्राम उत्सव’’ में तीसरे दिन सागर तटीय प्रदेश गोवा की लोक संस्कृति की धारा प्रवाहित हुई।
शिल्पग्राम के मुख्य रंगमंच ‘‘कलांगन’’ पर लोक कला एवं शिल्प परंपरा को बढ़ावा देने तथा कलाओं के प्रसार हेतु
आयोजित दस दिवसीय उत्सव में बुधवार शाम रंगमंच गोवा मय हो गया। गोवा के कला एवं संस्कृति संचालनालय द्वारा प्रायोजित गोवा के विशेष कला दल ने गोवा में बसने वाली विभिन्न समुदायों की संस्कृति को दर्शाया। इस अवसर पर गोवा का प्रसिद्ध फुगड़ी एवं कलशी फुगड़ी ने वहां का सौम्य स्वरूप दर्शकों को दिखाया तो देखणी में वहां की श्गारिक
कला को देखने का अवसर मिला जिसमें भारतीय और पश्चिमी संस्कृति का सम्मिश्रण उत्कृष्ट ढंग से किया गया।
प्रस्तुति में नर्तकियाँ विवाह समारोह में जाने के लिये नाविक से नदी पार करवाने का अनुरोध करते हुए उसे विभिन्न प्रकार का प्रलोभन देती हैं। गोवन लोक गीत ‘‘हंव साहिबा फलतड़ी वेईता’’ गीत पर नाविक और सजी संवरी महिलाओं ने मोहक नृत्य प्रस्तुति दी। धालो गोवा के कृषक समुदाय का नृत्य है जिसमें महिलाए गीत गाती हुए उत्सव मनाती नजर आती है।
गोवा में गणपति उत्सव के दौरान तथा वैवाहिक अवसरों पर किया जाने वाला नृत्य ‘‘समई’’ कार्यक्रम की सबसे लुभावनी प्रस्तुति रही। गोवा के पारंपरिक वाद्य घुम्मट,ढोलक, झांझ आदि पर गीतों की लय पर गोवा की नृत्यांगनाओं ने समई (दीप स्तम्भ) अपने शीश पर संतुलित करते हुए नृत्य किया। नृत्य के दौरान नृत्यांगनाओं ने विभिन्न प्रकार की आकर्षक संरचनाएँ बनाई तो दर्शकों ने करतल ध्वनि से कलाकारों का अभिवादन किया। गोवा के दल का नेतृत्व कला एवं संस्कृति संचालनालय के मिलिन्द माटे द्वारा किया गया।
रगमंच पर इसके अलावा दर्शकों को गुजरात का बेड़ा रास देखने को मिला। जाम खम्भालिया से आये कलाकारों ने
ढोल, शरनाई की थाप व धुन पर अपने सिर पर बेड़ा (मटके)रख कर नृत्य कर गुजरात की इस अनूठी रास परंपरा को दर्शाया। मणिपुर का स्टिक डांस दर्शकों को लुभाने में सफल रहा, मणिपुरी कलाकार ने स्टिक को अपने हाथों तथा शरीर के विभिन्न अंगों पर उत्कृष्ट ढंग से नियंत्रित करे दर्शकों की तालियाँ बटोरी। कलांगन पर इसके अलावा नगाड़ा वादन, सहरिया स्वांग, गोटीपुवा नृत्य का प्रदर्शित किया गया।
रामसिंह:पारीक:रमेश
वार्ता