अभिषेक बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने और कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की

नयी दिल्ली, 23 सितंबर (वार्ता) तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से तुरंत हटाने और निर्वाचन आयोग के कामकाज की अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक विशेष राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने के लिए लाखों मतदाताओं के अधिकार छीने जा रहे हैं। श्री बनर्जी ने अपने व्हाट्सएप चैनल पर एक पोस्ट में कहा, "मुख्य निर्वाचन आयुक्त को तुरंत हटाया जाना चाहिए और अदालत की निगरानी में जांच के आदेश दिए जाने चाहिए।" उन्होंने आरोप लगाया कि किसी एक राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने के लिए लाखों मतदाताओं के नाम काटना हमारे लोकतंत्र की नींव पर हमला है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा, " उच्चतम न्यायालय अपनी आंखें नहीं मूंद सकता। क्या भारत के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ इस पर कार्रवाई करेगी?"
श्री बनर्जी की यह टिप्पणी उन मीडिया रिपोर्टों के बाद आई है, जिनमें खुलासा हुआ है कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और डा विवेक जोशी ने मतदाता सूची संशोधन से जुड़े फैसलों पर पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इन आयुक्तों ने कथित तौर पर कहा कि कई फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे। आयोग के भीतर आंतरिक मतभेदों की रिपोर्टों ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को लेकर विपक्ष के हमलों को और तेज कर दिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। हालांकि, निर्वाचन आयोग के सूत्रों ने दावा किया है कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। यह विवाद अब उच्चतम न्यायालय भी पहुंच चुका है, जहां एसआईआर प्रक्रिया से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है।
मंगलवार को अदालत ने "तार्किक विसंगतियों" के आधार पर दिल्ली में मतदाताओं को जारी किए गए नोटिसों पर निर्वाचन आयोग से सवाल पूछे थे और पूछा था कि क्या ये नोटिस बिना दिमाग लगाए यांत्रिक तरीके से जारी किए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर अलग से कानूनी और राजनीतिक खींचतान चल रही है। निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय को बताया है कि इस प्रक्रिया के दौरान राज्य की मतदाता सूची से 27.16 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए थे, जिनमें से 22 लाख से अधिक लोगों ने बाद में नाम दोबारा शामिल करने के लिए अपील दाखिल की है।
आयोग ने अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृतक और डुप्लिकेट प्रविष्टियों की श्रेणियों का हवाला देते हुए इन नामों को हटाने का बचाव किया है। श्री बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद विपक्षी दलों की जताई गयी चिंताओं का जिक्र करते हुए कहा कि 'इंडिया' गठबंधन के घटकों ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों को पत्र लिखा था, लेकिन उन चिंताओं की न तो जांच की गई और न ही उन्हें उचित गंभीरता से लिया गया। पार्टी के राज्यसभा नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को दोहराते हुए याद दिलाया कि 60 से अधिक विपक्षी सांसदों ने पहले ही उन्हें हटाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया था।
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने एसआईआर के फैसलों में किसी भी प्रकार के विभाजन से इनकार किया है और कहा है कि पूरी प्रक्रिया तीनों निर्वाचन आयुक्तों की देखरेख में आयोजित की गई है। हालांकि, सामने आई आंतरिक आपत्तियों ने चुनाव निकाय के कामकाज, पारदर्शिता और संवैधानिक स्वायत्तता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
शोभित जितेन्द्र वार्ता

