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तटीय पोत परिवहन विधेयक, 2024 में मछुआरों के हितों की अनदेखी: विपक्ष

तटीय पोत परिवहन विधेयक, 2024 में मछुआरों के हितों की अनदेखी: विपक्ष

नयी दिल्ली, 01 अप्रैल (वार्ता) लोकसभा में तटीय पोत परिवहन विधेयक, 2024 पर चर्चा की मंगलवार को शुरुआत करते हुये कांग्रेस के मणिक्कम टैगोर ने कहा कि इस विधेयक में मछुआरों की हालत सुधारने के लिये कोई भी प्रभावी उपाय नहीं है।

श्री टैगोर ने कहा कि देश के लगभग 10 लाख मछुआरों की आय बहुत कम है और इस विधेयक में उनकी दशा में सुधार के लिये कोई प्रावधान नहीं है। मछुआरे आज मजदूर हो गये हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि मछुआरों को प्रशिक्षण देकर उन्हें बेहतर आमदनी कमाने का रास्ता बताया जाना चाहिये। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बंदरगाहों से जुड़े कार्यों का संचालन करने के लिये उद्योगपति गौतम अडानी की कंपनियों को तो बढ़ावा दे रही है लेकिन बंदरगाहों और समुद्री तटों पर जीवनयापन के लिये आश्रित लोगों की तकलीफ दूर करने के कोई ठोस उपाय नहीं किये गये हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को मछुआरों की आवाज बननी चाहिये।

भारतीय जनता पार्टी के अरुण गोविल ने कहा कि मोदी सरकार समुद्री ताकत पर पूरा ध्यान दे रही है। समुद्र परिवहन का विस्तार हुआ है और इस क्षेत्र में रोजगार के नये अवसर पैदा हुये हैं। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के प्रावधानों के लागू होने से भारत के व्यापार में स्थानीय शिपिंग कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी। उन्होंने विधेयक को पर्यावरण हितैषी बताया। उन्होंने कहा कि इसमें निवेश की सुरक्षा का भी प्रावधान है और किसी कंपनी का लाइसेंस उसके धारक का पक्ष सुने बिना रद्द नहीं किया जा सकेगा।

समाजवादी पार्टी के नरेश उत्तम पटेल ने कहा कि इस विधेयक के प्रावधानों के लागू होने से सारी शक्तियां केन्द्र में निहित हो जायेंगी और संबंधित राज्यों के अधिकारों पर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने सवाल किया कि बंदरगाह से जुड़े मामलों में सारे अधिकार शिपिंग महानिदेशक को देना क्या संघवाद का सम्मान है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक से नौकरशाही को बढ़ावा मिलेगा और यह केवल बड़े-बड़े कारपोरेट घरानों के फायदे के लिये हैं। उन्होंने भी कहा कि अडानी उद्योग समूह को 14 बंदरगाह और टर्मिनल के परिचालन के अधिकार दिये गये हैं, जो सोच का विषय है।

श्री पटेल ने कहा कि यह विधेयक पर्यावरण संरक्षण के लिये सख्त नियम नहीं बनाता है। बुनियादी ढांचे को नजरअंदाज करता है, मछुआरों की चिंता नहीं करता है और उनके जीविकोपार्जन पर कुठाराघात करता है।

तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने कहा कि बंदरगाहों की स्थिति सुधारने के लिये बहुत कुछ किये जाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में घरेलू शिपिंग कंपनियों को प्रोत्साहित करने और कम से कम 50 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई घरेलू पोतों और भारतीय नावों से कराये जाने के प्रयास होने चाहिये।

श्री राय ने भी शिपिंग महानिदेशक के अधिकार बढ़ाये जाने पर चिंता जतायी। उन्होंने कहा कि शिपिंग क्षेत्र में भारतीयों को नौकरी देने को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।

द्रमुक के डी एम कथिर आनंद ने कहा कि तमिलनाडु में कई शिपयार्ड दशकों से उपेक्षित पड़े हैं, जिनका पुनरुद्धार कराया जाना चाहिये। उन्होंने मांग की कि केन्द्र तमिलनाडु सरकार द्वारा चेन्नई में बनाये जा रहे पोत निर्माण सुविधा के लिये वित्तीय सहायता दे। उन्होंने समुद्री परिवहन के क्षेत्र में राज्यों को भागीदार बनाने की पुरजोर वकालत की। उन्होंने यह भी कहा कि समुद्रों में खनिज तेल के कारण होने वाले प्रदूषण के दुष्प्रभावों से मछुआरों की रक्षा की जानी चाहिये।

उन्होंने कहा कि तूतीकोरिन पोतपत्तन की क्षमता बढ़ाने की भी मांग की।

तेलुगुदेशम के एल श्रीकृष्ण देवरायुल ने विधेयक का समर्थन करते हुये कहा कि विधेयक में जल मार्गों माल परिवहन हो को बढ़ावा देने पर ध्यान ध्यान दिया गया है, जो सराहनीय है। उन्होंने भी कहा कि कम से 50 प्रतिशत माल ढुलाई घरेलू जहाज रानी कंपनियों के माध्यम से कराने का लक्ष्य होना चाहिये।

जनता दल (यू) डॉ आलोक कुमार सुमन ने कहा कि समुद्र के रास्ते माल परिवहन सस्ता पड़ता है। उन्होंने सुरक्षा और प्रदूषण पर ध्यान दिये जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस विधेयक का समर्थन करते हुये उन्होंने कहा कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा, तटीय शिपिंग की अड़चने दूर होंगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की सुप्रिया सुले ने कहा कि मछुआरों को संरक्षण दिया जाना चाहिए और सरकार को मैरीटाइम तथा पोर्ट को लेकर घालमेल करने की बजाय मछुआरों के प्रति बहुत संवेदनशील होकर काम करना चाहिए। उनका कहना था कि जो टाइमलाइन दी जाती है उसे बहुत प्रभावी होना चाहिए। सरकार को मुछुआरों की समस्या पर ध्यान देते हुए आधुनिकीकरण तथा डिजिटलीकरण जरूरत के अनुसार उनके काम में बदलावा लाने का काम करना चाहिए। सरकार को कारोबार को आसान बनाने के लिए काम करना चाहिए और आयकर, जीएसटी आदि के दायित्वों का जिम्मेदारी से निर्वहन करना चाहिए।

शिवसेना के रवींद्र दत्ताराम वायकर ने कहा कि शिवजी महाराज तटीय क्षेत्र को महत्व देते थे, इसीलिए उन्होंने तटों पर अपने किले बनाए थे। यह विधेयक देश को भारत को हब के रूप में पेश करता है और इस विधेयक के प्रावधान मैरीटाइम कारोबार को प्रोत्साहित करने वाला है और कारोबार को असान बनाने की व्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है। इस समय देश में पोर्ट क्षेत्र के विकास में बड़ा महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है और बंदरगाहों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। ऐसे समय पर इस विधेयक से इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलावा आएंगे। बंदरगाहों को आधुनिकीकरण तथा डिजीटलीकरण किया जाना चाहिए। तटीय क्षेत्र में यातायात ढांचे को मजबूत करने का काम किया जाना चाहिए और पोर्ट व्यवस्था में और सुधार होना चाहिए।

कांग्रेस की सुधा आर ने कहा कि गहरे समुद्र में तेल की निकासी के लिए काम होते हैं, जहाजों का जो प्रबंधन होता है उसमें पारिस्थितकी परिवर्तन पर ध्यान दिया जाना चाहिए और सार्वजनिक क्षेत्र के लिए नीतिगत तरीके से काम होना चाहिए। सरकार ने मछुआरों के लिए कुछ नहीं किया है जबकि इस समुदाय का योगदान देश के आर्थिक विकास में कुछ नहीं किया गया है। सरकार को बताना चाहिए कि वह तमिलनाडु में तटवर्ती क्षेत्र के हजारों मछुआरे के हित के लिए क्या काम कर रही है। मछलीपालक सिर्फ मछली ही पालते हैं और वही उनकी जीविका है, लेकिन जब वे गहरे समुद्र में जाते हैं श्रीलंका के नौ सैनिक उनका उत्पीड़न करते हैं। उसे रोका जाना चहिए। सरकार मछुआरों के बारे में चिंतित नहीं है जबकि देश में तीन करोड़ मछुआरे हैं। उन्होंने कहा कि अब एटीएम से पैसे निकालने पर भी सरकार वसूली करने में जुट गई है। मतलब सरकार गरीबों को लूट रही है, लेकिन उसे ऐसा नहीं करना चाहिए।

भाजपा के मुकेश कुमार चंद्रकांत दलाल ने कहा कि जो समुद्र में चक्कर लगाने वाले जहाज हैं उनकी संख्या में 2030 तक वृद्धि किए जाने का प्रस्ताव इससे मालिकों को फायदा होगा। जहाज निर्माण के क्षेत्र में आने वाले समय में तेजी आएगी और इसमें पूरी तरह से विदेशी निवेश होगा।। उनका कहना था कि देश में तेजी से जहाजों का निर्माण हो रहा है और अगले एक दशक में देश में हजारों नये जहाजों का निर्माण किया जाएगा। उनका कहना था कि इस विधेयक के पारित होने से तटीय क्षेत्र में गतिविधियां तेज होगी और पोर्टों पर जहाजों की आवाजाही बढ़ेगी जिससे देश में आयात निर्यात को और आसान बनाया जा सकेगा।

राष्ट्रीय जनता दल के सुधाकर सिंह ने कहा कि इस विधेयक में रोजगार निर्माण की बात तो करता है, लेकिन इसमें भारतीयों को रोजगार देने के बारे में कुछ नहीं लिखा है इसलिए इस विधेयक में कम से कम 50 प्रतिशत नौकरी भारतीयों के लिए होनी चाहिए। लॉजिस्टिक को मजबूत बनाने की विधेयक में कोई चर्चा नहीं की गई है। सरकार ने जिन जलमार्गों की बात की है और इसके जरिए नेपाल को जोड़ा जाना चाहिए इसलिए अंतर्राज्यीय जल मार्ग को महत्व देना चाहिए क्योंकि इसमें ढुलाई बहुत सस्ती है। जल मार्ग यातायात सिर्फ सस्ता मालढुलाई का काम ही नहीं करता है बल्कि इससे माल ढुलाई के दौरान प्रदूषण जैसी समस्या से भी निजात मिलती है।

जनसेना पार्टी के टी उदय श्रीनिवास ने कहा कि उनका निर्वाचन क्षेत्र काकीनाडा, भारत के पोत निर्माण का बड़ा केन्द्र बन सकता है। उन्होंने कहा कि विधेयक का समर्थन किया।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) के राजाराम सिंह ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि पहले पीपीपी का शब्द था पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप और अब पीपीपीपी यानी पब्लिक प्रापर्टी फार प्राइवेट प्राॅफिट का भाव समझ में आ रहा है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से निजी मुनाफे को देश की सुरक्षा बताने की कोशिश की गयी है। उन्होंने एक ही उद्योगपति की देश के सभी बुनियादी ढांचे पर कब्जे पर भी चिंता जतायी।

समाजवादी पार्टी के आनंद भदौरिया ने विधेयक को राष्ट्रविरोधी और छोटे जहाज मालिकों को नुकसान करने वाला कहा कि मछुआरा समुदाय आज संकट में है जिसने भगवान राम को नाव में बिठा कर गंगा पार करायी थी। उन्होंने कहा कि भारतीय नौकाओं को लाइसेंस की जरूरत नहीं होने की बात बेमानी है। क्योंकि विदेशी जहाजों को आने की छूट दी गयी है और उन्हें अपतटीय क्षेत्रों में खनन की छूट मिलेगी जिससे भारतीय मछुआरों को नुकसान होगा। उन्होंने सरकार की मछुआरों को सामाजिक आर्थिक सहारा देने की मांग की। जहाज को जब्त करने का अधिकार दिया जाना उनके उत्पीड़न को बढ़ावा देना है।

द्रमुक की डा. रानी श्रीकुमार ने कहा कि इस विधेयक में महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान नहीं होता है। सोचा था कि इससे तटीय शिपिंग को बढ़ावा मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जहाजरानी महानिदेशक को असाधारण अधिकार दिये गये हैं। भारतीय जहाजरानी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाये गये हैं।

आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि विधेयक में जहाजरानी महानिदेशालय को अकूत अधिकार दिये गये हैं और इसके प्रावधानों से जहाजों के मालिकों का उत्पीड़न होगा। उन्होंने अन्य विभागों को भी इस व्यवस्था में शामिल करने की मांग की।

भाजपा के दर्शन सिंह चौधरी ने विधेयक के समर्थन में बोलते हुए कहा कि भारत की सीमाएं तीन ओर से समुद्र से घिरीं हैं। इस विधेयक से तटीय शिपिंग को बढ़ावा देना और अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। तटीय शिपिंग में कार्बन उत्सर्जन कम होता है। इसलिए ये पर्यावरण का संरक्षण होता है। रामसेतु को तोड़ने की कोशिश की। हमने विरासत भी दी और विकास भी किया। मछुआरों की आर्थिक सामाजिक स्थिति भी मजबूत होगी। माल की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

कांग्रेस के कैप्टन बिरिआतो फर्नांडीस और वीसीके के डी रविकुमार ने चर्चा में भाग लिया।

सचिन

वार्ता

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