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त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक राज्यसभा में पारित, दो लाख नये पैक्स खोले जायेंगे

नयी दिल्ली 01 अप्रैल (वार्ता) राज्यसभा ने त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक 2025 को विपक्ष के संशोधनों को खारिज करते हुए मंगलवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया जिसके साथ ही इस पर संसद की मुहर लग गयी।
लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है।
सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने विधेयक पर करीब साढे चार घंटे तक चली चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने कहा कि देश में सहकारिता क्षेत्र को संस्थागत रूप देने के लिए इस विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है और इसीलिए यह विधेयक लाया गया है। सहकारिता क्षेत्र को आने वाले समय में 17 लाख युवाओं की जरूरत पड़ेगी और यह विश्वविद्यालय इसकी पूर्ति करने में सहयोग करेगा।
उन्होंने कहा कि देश के हर गांव को पैक्स से जोड़ने के लिए दो लाख पैक्स बनाये जा रहे हैं। इनमें से 14 हजार समितयां बन भी गयी है। हर पैक्स में एक महिला तथा अनुसूचित जाति के सदस्य की मौजूदगी अनिवार्य बनायी गयी है। उन्होंने कहा कि सरकार राज्यों में सहकारिता तंत्र को मजबूत बनाने के लिए अनेक कदम उठा रही है और पूरे देश में सहकारी संस्थाओं का डेटा बेस तैयार किया जा रहा है।
विधेयक में ग्रामीण प्रबंधन संस्थान, आणंद, गुजरात (आईआरएमए) को त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करने का प्रावधान है। अभी आईआरएमए एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत है।
यह विश्वविद्यालय सहकारी क्षेत्र में शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान करेगा और क्षमता निर्माण करेगा। साथ ही यह संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास गतिविधियां संचालित करेगा। यह डिग्री प्रोग्राम, दूरस्थ शिक्षा और ई-लर्निंग पाठ्यक्रम पेश करेगा और सहकारी क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र विकसित करेगा। यह भारत में या भारत के बाहर किसी अन्य स्थान पर दूरस्थ परिसर या संबद्ध संस्थान स्थापित कर सकता है।
श्री मोहोल ने कहा कि भारत ने वर्ष 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है। देश में आठ लाख सहकारी संस्थाएं हैं जिनके सदस्यों की संख्या 20 करोड़ है। उन्होंने कहा कि सहकारिता के बजट में दस गुना की वृद्धि के साथ यह 11 सौ करोड़ रूपये तक पहुंच गया है। देश में सहकारी आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया है। देश भर में प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समिति पैक्स का कंप्यूटरीकृत किया जा रहा है।
विधेयक के नाम को लेकर उठाये गये सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि त्रिभुवन दास जी ने देश में सहकारिता की नींव रखी और उनके योगदान को देखते हुए उनका नाम इसके साथ जोड़ा गया है तथा यह देश के लिए गौरव का विषय है।
संजीव
वार्ता
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