वायुसेना की असली ताकत आधुनिक विमान नहीं, जरूरत के समय तेजी से कार्रवाई की क्षमता है: वायु सेना प्रमुख

नयी दिल्ली, 08 अक्टूबर (वार्ता) वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने कहा है कि किसी भी वायुसेना की असली ताकत अत्याधुनिक विमानों और प्रणालियों से नहीं, बल्कि उसकी संचालन तैयारियों तथा जरूरत के समय तेजी से भरोसे के साथ की जाने वाली सटीक कार्रवाई से मापी जाती है।
गाजियाबाद के हिंडन वायुसेना स्टेशन पर 94वें वायुसेना दिवस के अवसर पर वायु सेना प्रमुख ने गुरुवार को कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे संघर्षों ने यह साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए वायुशक्ति प्रमुख साधन है। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों को समझती है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सतर्क, प्रतिबद्ध तथा तैयार है। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि "राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए वायु शक्ति प्रमुख साधन है। भारतीय वायुसेना सतर्क, प्रतिबद्ध और किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि वायुसेना की परिचालन क्षमता और तैयारी सही दिशा में आगे बढ़ रही है। वायु सेना प्रमुख ने कुछ दिन पहले ही वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में यह बात मानी थी कि वायु सेना के बेड़े में लड़ाकू विमानों की संख्या कम है। इसका उल्लेख किए बिना उन्होंने आज कहा , "किसी वायुसेना के पास दुनिया के सबसे उन्नत विमान हो सकते हैं, लेकिन उसकी वास्तविक ताकत उसकी संचालन तैयारी से मापी जाती है, यानी जरूरत पड़ने पर वह कितनी तेजी और कितने भरोसे के साथ कार्रवाई कर सकती है।"
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वायुसेना का तेजी से युद्धक अभियानों में उतरना उसकी "मारक क्षमता के साथ-साथ प्रभावी वायु रक्षा अभियानों" को दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा , "अचूक, अभेद्य, सटीक' केवल एक नारा नहीं है, यह हमारी ताकत और दृढ़ संकल्प का प्रत्यक्ष रूप है।" वायुसेना प्रमुख ने कहा कि आधुनिक युद्ध में सफलता के लिए गहरा तालमेल जरूरी है और सेना तथा नौसेना के साथ संयुक्त योजना और एकीकृत युद्धक क्षमता पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने प्रौद्योगिकी विकास और आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया। वायु सेना प्रमुख ने कहा कि आत्मनिर्भरता वायुसेना का मार्गदर्शक सिद्धांत है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वायत्त प्रणालियों जैसी नई तकनीकों को शामिल किया जाएगा, लेकिन ऐसा करते समय मानवीय नियंत्रण को केंद्र में रखा जाएगा।
उन्होंने अंतरिक्ष को वायु क्षेत्र का स्वाभाविक विस्तार बताते हुए इस क्षेत्र में इसरो और घरेलू अंतरिक्ष उद्योग के साथ बढ़ते सहयोग का भी उल्लेख किया। वायुसेना दिवस का इस वर्ष का विषय 'भारतीय वायु सेना: अचूक, अभेद्य व सटीक' था। समारोह में लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, निर्देशित हथियार प्रणालियां, रडार और एकतरफा हमला करने वाले मानव रहित हवाई सिस्टम प्रदर्शित किए गए। समारोह में वीरता और विशिष्ट सेवा के लिए वायु यौद्धाओं को पदक और पांच इकाइयों को उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र भी दिए गए।
संजीव, मधुकांत वार्ता

