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मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को अनुमोदित करने वाला सांविधिक प्रस्ताव पारित

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को अनुमोदित करने वाला सांविधिक प्रस्ताव पारित

नयी दिल्ली, 02 अप्रैल (वार्ता) लोकसभा ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को दो माह के लिए अनुमोदित करने वाले प्रस्ताव को आज रात दो बजे ध्वनिमत से पारित कर दिया।
गृहमंत्री अमित शाह ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के अनुमोदन के लिए आए संकल्प पर सदस्यों की चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार वहां शांति बहाल करने के लिए सारे प्रयास कर रही हैं और इस घटना का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। वहां के लोगों के प्रति सबको संवेदना रखनी चाहिए। राष्ट्रपति शासन लगने के बाद दोनों समुदायों में वार्ता करने का प्रयास किया गया ताकि शांति बहाल की जा सके। मणिपुर में शांति बहाल हो इसका सरकार प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि वहां शिक्षा और अन्य कार्य सुचारु किया जा रहे हैं। उनका कहना था कि वहां एक फैसले की बात स्थिति बिगड़ी लेकिन जो कुछ हुआ वह अच्छा नहीं था। वहां हिंसा नहीं होनी चाहिए, इस पर सब की सहमति है। उन्होंने कहा कि वहां 1996 में जाति अहिंसा हुई जो 5 साल तक चली और 750 से ज्यादा लोग मारे गए। पहले हुई हिंसा की घटनाओं में वहां जान माल का बड़ा नुकसान हुआ है और कई है वहां तक हिंसा होती रही इसलिए यह कहना ठीक नहीं है कि वहां इस बार ही हिंसा हुई है।
इससे पहले मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को लेकर संसद में संविधिक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के शशि थरूर ने कहा कि मणिपुर में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और सरकार को वहां स्थिति सामान्य बहाल करने के लिए काम करने चाहिए थे लेकिन उसने मणिपुर के लोगों की समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया।
समाजवादी पार्टी के लाल जी वर्मा ने कहा कि सरकार ने मणिपुर के लोगों को उनकी हालत पर छोड़ा है। उनके लिए सरकार ने कहीं कोई चिंता नहीं जताई और वहां के लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया जिसके कारण वह स्थिति और बिगड़ी।
तृणमूल कांग्रेस की सयानी घोष ने कहा कि सरकार की नीतियां मणिपुर विरोधी रही है। वहां 22 महीने से स्थिति बिगड़ी हुई है जिसमें कई लोगों की जान गई है। चारों तरफ आग लगी रही और पूरी दुनिया में मणिपुर की चर्चा होती रहे लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि विश्व बंधुत्व की बात करने वाली भाजपा सरकार को पहले अपने लोगों की चिंता करनी चाहिए थी और मणिपुर को सामान्य स्थिति में लाने का काम करना था जो वह नहीं कर पाई।
डीएमके कि कनिमोझी करुणा निधि ने कहा कि मणिपुर के हालात को लेकर आधी रात को चर्चा हो रही है। वहां 260 से ज्यादा लोग हिंसा में मारे गए। यह गंभीर घटना थी और इस पर कल भी चर्चा की जा सकती थी। वहां असंख्य माताओं को पता ही नहीं है कि उनके बच्चे कहां चले गए और यहोवा ए दिन की घटना हो गई लेकिन सरकार इस पर चुप्पी साधे है। सरकार को मणिपुर में विभाजन की राजनीति करने की बजाय वहां लोगों में एकता कायम हो, इस दिशा में काम करना चाहिए।
शिवसेना उद्धव गुट के अरविंद सावंत ने कहा कि मणिपुर की हालत देखकर मन बहुत व्यथित होता है। उनका कहना था कि सरकार दावा करती है कि वह तुरंत एक्शन लेती है लेकिन मणिपुर के मामले में वह चुप बैठी रही। वहां समाज में जो दरार पैदा हुई है उसे कम करने के लिए सरकार को कम करना चाहिए।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एसपी की सुप्रिया सुले ने कहा कि मणिपुर की जो हालात है उसके लिए सबको मिलकर काम करना चाहिए। राष्ट्रीय जनता दल के अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि मणिपुर पर सरकार में ध्यान नहीं दिया है जबकि वहां पर बर्बरता होती रही है। सरकार को वहां तुरंत राहत पुनर्वास के कार्य करने चाहिए और शांति बहाली पर वहां निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने चाहिए। जिन लोगों ने वहां हिंसा फैलाई है उन्हें सजा मिलनी चाहिए।
कांग्रेस के किशोरी लाल ने कहा कि मणिपुर सरकार की सफलता का प्रतीक है और सरकार की वहां ध्यान नहीं देने के कारण मणिपुर संकट के दौर से गुजर रहा है। सरकार को मणिपुर की स्थिति संभालने के लिए समय पर कदम उठाना चाहिए था लेकिन उसने इस दिशा में कुछ काम नहीं किया। मणिपुर को लेकर कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव ला रही थी लेकिन सरकार ने उससे एक दिन पहले ही वहां राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वहां जाकर लोगों के घाव पर मलहम लगाना चाहिए और मणिपुर को नासूर नहीं बनने देना चाहिए। वह पुनर्वास का कार्य तुरंत आरंभ किया जाना चाहिए।
अभिनव सैनी
वार्ता

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